WELCOME TO DEV BHOOMI • हिमालय की जीवित स्मृति

उत्तराखंड
देवभूमि

जहाँ पर्वतों में कथा है, नदियों में स्मृति है और गाँवों में पीढ़ियों की आवाज़। आइए, उत्तराखंड को केवल देखें नहीं—उसे जानें।

9 नवंबर 2000 — उत्तराखंड राज्य का गठन • गढ़वाल और कुमाऊँ
53,483वर्ग किमी
2मंडल
1जीवित विरासत
उत्तराखंड के Kairwaan गाँव में Spilopelia chinensis यानी घुघुती का वास्तविक छायाचित्र
घुघुती · Spilopelia chinensis · Kairwaan, Uttarakhand · फोटो: Wikimedia Commons / Satdeep Gill
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एक परिचय

एक राज्य नहीं,
एक जीवित विरासत।

हिमालयी भूभाग से लेकर गंगा के मैदानी क्षेत्र तक फैला उत्तराखंड प्रकृति, पुरातत्व, लोकस्मृति और राजनीतिक इतिहास की अनेक परतों को समेटे हुए है।

यह वेबसाइट इन्हीं परतों को एक जगह लाने का प्रयास है—दस्तावेज़ित इतिहास, लोकपरंपरा और किंवदंती को स्पष्ट रूप से अलग रखते हुए।

Journey Through Time

समय की नदी में

मुख्य ऐतिहासिक पड़ावों की पहली रूपरेखा। विस्तृत अध्याय आगे जोड़े जाएंगे।

01प्राचीन काल

आरंभिक राजवंश

शिलालेख, ताम्रपत्र और पुरातात्विक साक्ष्यों से इतिहास की शुरुआती परतें।

02मध्यकाल

कत्युरी परंपरा

कत्यूर क्षेत्र और उससे जुड़ी प्रशासनिक व सांस्कृतिक परंपराएँ।

03मध्यकाल

चंद वंश

कुमाऊँ में चंद सत्ता, विस्तार, राजधानी और शासन व्यवस्था।

04गढ़वाल

पंवार/परमार

गढ़वाल की राजसत्ता और उसके विकास की ऐतिहासिक कथा।

0518वीं–19वीं शताब्दी

गोरखा राज्य

कुमाऊँ विजय, गढ़वाल पर आक्रमण, प्रशासन और संगौली की संधि।

06आधुनिक काल

राज्य आंदोलन

लंबे जनआंदोलन के बाद 9 नवंबर 2000 को उत्तराखंड राज्य का गठन।

Two Cultural Landscapes

गढ़वाल & कुमाऊँ

दो क्षेत्र, अनेक साझा धागे—और अपनी-अपनी विशिष्ट ऐतिहासिक यात्राएँ।

गढ़वाल

पर्वतों की राजगाथा

गढ़वाल के राजवंश, तीर्थ, लोककथाएँ और हिमालयी जीवन की परतें।

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कुमाऊँ

कत्यूर से चंद तक

कुमाऊँ की राजसत्ता, लोकगाथाओं और ऐतिहासिक नगरों की यात्रा।

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Stories of the Land

जब इतिहास
लोक में जीवित रहता है।

राजुला–मालूशाही, रामौला, हुड़की बोल, जागर और पवांड़े जैसी लोकपरंपराएँ इस भूमि की स्मृति को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे ले जाती हैं।

राजुला–मालूशाही की लोकगाथा को सुनें: नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके आपकी साझा की हुई वीडियो सीधे खुलेगी।

▶ राजुला–मालूशाही की कथा देखेंलोकपरंपराएँ देखें →

Heritage & Evidence

जो पत्थर और ताम्रपत्र कहते हैं

वे साक्ष्य जिनसे अतीत की परतों को पढ़ा जा सकता है।

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शिलालेख

कैल्सी, गोपेश्वर, बागेश्वर, लक्ष्मणपुर/लाखामंडल और अन्य अभिलेखीय साक्ष्य।

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ताम्रपत्र

जागेश्वर, पांडुकेश्वर, तालेेश्वर और अन्य स्थानों से जुड़े ताम्रपत्र स्रोत।

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सिक्के

कुणिंद, परमार और चंद परंपराओं से जुड़े मुद्राशास्त्रीय संकेत।

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पुरातत्व

मूर्तियाँ, स्थापत्य, मृद्भांड, शैलचित्र और अन्य पुरातात्विक अवशेष।

Explore the Geography

चार भौगोलिक संसार

स्रोत सामग्री के अनुसार राज्य को अध्ययन की सुविधा के लिए महान हिमालयी, मध्य हिमालयी, शिवालिक हिमालयी और गंगा के मैदानी क्षेत्रों में देखा जा सकता है।

01 महान हिमालय02 मध्य हिमालय03 शिवालिक हिमालय04 गंगा का मैदानी क्षेत्र
उत्तराखंडप्रमुख स्थल
उत्तराखंड का शैलीबद्ध भौगोलिक मानचित्र उत्तराखंड का एक स्व-निर्मित, अध्ययनात्मक मानचित्र जिसमें गढ़वाल और कुमाऊँ की दिशा तथा पाँच प्रमुख स्थलों के क्लिक योग्य स्थान दिखाए गए हैं। गढ़वाल कुमाऊँ हिमालयी क्षेत्र N बद्रीनाथ केदारनाथ देवप्रयाग ऋषिकेश अल्मोड़ा प्रमुख स्थलों का अध्ययनात्मक मानचित्र • सीमाएँ सांकेतिक • क्लिक करके स्थल देखें
किसी स्थल पर क्लिक करें · चित्र और विवरण देखें

Featured Story

केदारखंड से आधुनिक उत्तराखंड तक

एक ऐसी यात्रा जिसमें भूगोल, तीर्थ, राजसत्ता, लोकस्मृति और आधुनिक राज्य-चेतना एक-दूसरे से जुड़ते हैं।

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Your Roots. Your Story.

अपनी जड़ों को
फिर से जानिए।

देवभूमि की कहानी अभी पूरी नहीं हुई है। यह तो बस शुरुआत है।

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